पक्ष
कम फास्ट -----------------गो फास्ट ------------------दो फास्ट ---
आज की जीवन शैली ही यही है –सब कुछ फास्ट । इस भागम-भाग की जिंदगी को यदि किसी ने आसान किया है तो वह है फास्ट –फ़ूड अर्थात जल्दी तैयार हो जाने वाला भोजन । भोजन भी वह जो तज्जा हो , स्वादिष्ट हो , और स्वास्थ्यवर्धक भी हो । हा वेह , यही है आज आसन फास्ट- फ़ूड जिसने हमारी जिंदगी को सुकून दिया है । अन्यथा भूखे रहकर कब का युवा –वर्ग अन्तिम साँसे गिन रहा होता ।
आज कंप्यूटर का युग है । हर कार्य भी उसी गति से हो रहा है । सच मानिए आज किसको फुर्सत है जो आज खाना भी कोई आराम से खा सके । बनाने की तो कौन सोचे । सुबह उठकर ज़रा बहार झाँक कर तो देखिये ------सूर्य की किरनों के आगमन से पूर्व ही लोग बसों के इन्तिज़ार में खड़े होते हैं । बच्चे स्कूल बैग लिए बस के इन्तिज़ार में निंदी आंखों से हाथ में पकड़ा सैंड -विच खातेA नज़र आएंगे । सैंड-विच जायेंगे . क्या करे . संद्वित्च , बेर्गेर, मग्गी आदि खाद्य पदार्थो ने ही तो उन्हें सहारा दिया है । आज किस माँ को इतनी फुर्सत है की जो सुबह उठकर परांठे भी बनाए और स्वयम भी काम पर निकले । वह भी काल प्रथ कोई कोण नही । और-----बन्नने तो जानते ही है की स्वास्थ्य के लिए परांठे कितने अस्वस्थ्य- करक है . वजन भी बढाते है और बीमारियों को भी आमंत्रण भी देते है. ऐसे में एक ही सहारा है फास्ट –फ़ूड .
यथानाम तथो गुनह . फास्ट फ़ूड यानी जल्दी तैयार होने वाला , जल्दी खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ . जो कही भी , कभी भी , कैसे भी खाया जा सकता है . न प्लेट की जरुरत है , न कटोरी की और न ही चमच की . एक पेपर नैपकिन ही पर्याप्त है उसे रखने और खाने के लिए . कितना अच्छा है यह भोजन न हाथ गंदे न कपड़े गंदे .
में आज की याद करता हु . वो दिन जब दाल चावल या सब्जी-रोटी खाते वक्त कुछ न कुछ गिर ही जाता था . कपड़े पीले , हाथ पीले, यहाँ तक की उसका असर कॉपी और किताब पर ही दिखाए देने लगता . और फ़िर माँ के क्रोध का असर मुझ पर------. समझ ही गए होंगे आप ---------की कितनी मुसीबत थी खाना बनाना और कही भी ले जाना .
फास्ट –फ़ूड ने हमारी दिनचर्या को फास्ट बना दिया है . बस यु समझो की ‘ चाट मंगनी, पट शादी ‘.अर्थात थोड़े समय में ही भोजन का पूर्ण आनंद लीजिये. झटपट बनाइये और मनचाहे तब खाइए . बनाना की भी जरुरत नही . किसी भी जगह , किसी भी समय आपको मिल जायेंगे . ये ‘फास्ट –फ़ूड ’ होटल में, रेस्तरां में , बाज़ार में , थाले पर, गली में , नुकड़ पर और घर में भी ------है न मजेदार-----ये फास्ट-फ़ूड.
एक ज़माना था जब घर की महिलाये दिन का ज्यादातर समय कित्चें में ही बिताती थी . उनके हाथो से, साड़ी से मस्सलो की महक आती रहती थी. आज माँ भी खुश और हम भी खुश . माँ को रसोई में जान नही पड़ता और हमें भी उस पारंपरिक खाने से छुटकारा मिला .
आज महिलाये रसोई को छोड़ आगे बाद चुकी है . आज उनके हाथ में बेलन और कद्ची नही. उनके हाथ में पुस्तके है. , फाइल है , यहाँ तक की तीर है , तलवार है .आज उनका जीवन इस फास्ट-फ़ूड से और भी आसन हो गया है . हमारा भी , इसका भी , उनका भी , उसका भी , तुम्हारा भी ------है ---न
शायद यह देखकर कवि ने कहा है –
पूर्व युग- सा आज का जीवन नही लाचार,
आ चुक्का है दूर-द्वापर से संसार.
कम फास्ट -----------------गो फास्ट ------------------दो फास्ट ---
आज की जीवन शैली ही यही है –सब कुछ फास्ट । इस भागम-भाग की जिंदगी को यदि किसी ने आसान किया है तो वह है फास्ट –फ़ूड अर्थात जल्दी तैयार हो जाने वाला भोजन । भोजन भी वह जो तज्जा हो , स्वादिष्ट हो , और स्वास्थ्यवर्धक भी हो । हा वेह , यही है आज आसन फास्ट- फ़ूड जिसने हमारी जिंदगी को सुकून दिया है । अन्यथा भूखे रहकर कब का युवा –वर्ग अन्तिम साँसे गिन रहा होता ।
आज कंप्यूटर का युग है । हर कार्य भी उसी गति से हो रहा है । सच मानिए आज किसको फुर्सत है जो आज खाना भी कोई आराम से खा सके । बनाने की तो कौन सोचे । सुबह उठकर ज़रा बहार झाँक कर तो देखिये ------सूर्य की किरनों के आगमन से पूर्व ही लोग बसों के इन्तिज़ार में खड़े होते हैं । बच्चे स्कूल बैग लिए बस के इन्तिज़ार में निंदी आंखों से हाथ में पकड़ा सैंड -विच खातेA नज़र आएंगे । सैंड-विच जायेंगे . क्या करे . संद्वित्च , बेर्गेर, मग्गी आदि खाद्य पदार्थो ने ही तो उन्हें सहारा दिया है । आज किस माँ को इतनी फुर्सत है की जो सुबह उठकर परांठे भी बनाए और स्वयम भी काम पर निकले । वह भी काल प्रथ कोई कोण नही । और-----बन्नने तो जानते ही है की स्वास्थ्य के लिए परांठे कितने अस्वस्थ्य- करक है . वजन भी बढाते है और बीमारियों को भी आमंत्रण भी देते है. ऐसे में एक ही सहारा है फास्ट –फ़ूड .
यथानाम तथो गुनह . फास्ट फ़ूड यानी जल्दी तैयार होने वाला , जल्दी खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ . जो कही भी , कभी भी , कैसे भी खाया जा सकता है . न प्लेट की जरुरत है , न कटोरी की और न ही चमच की . एक पेपर नैपकिन ही पर्याप्त है उसे रखने और खाने के लिए . कितना अच्छा है यह भोजन न हाथ गंदे न कपड़े गंदे .
में आज की याद करता हु . वो दिन जब दाल चावल या सब्जी-रोटी खाते वक्त कुछ न कुछ गिर ही जाता था . कपड़े पीले , हाथ पीले, यहाँ तक की उसका असर कॉपी और किताब पर ही दिखाए देने लगता . और फ़िर माँ के क्रोध का असर मुझ पर------. समझ ही गए होंगे आप ---------की कितनी मुसीबत थी खाना बनाना और कही भी ले जाना .
फास्ट –फ़ूड ने हमारी दिनचर्या को फास्ट बना दिया है . बस यु समझो की ‘ चाट मंगनी, पट शादी ‘.अर्थात थोड़े समय में ही भोजन का पूर्ण आनंद लीजिये. झटपट बनाइये और मनचाहे तब खाइए . बनाना की भी जरुरत नही . किसी भी जगह , किसी भी समय आपको मिल जायेंगे . ये ‘फास्ट –फ़ूड ’ होटल में, रेस्तरां में , बाज़ार में , थाले पर, गली में , नुकड़ पर और घर में भी ------है न मजेदार-----ये फास्ट-फ़ूड.
एक ज़माना था जब घर की महिलाये दिन का ज्यादातर समय कित्चें में ही बिताती थी . उनके हाथो से, साड़ी से मस्सलो की महक आती रहती थी. आज माँ भी खुश और हम भी खुश . माँ को रसोई में जान नही पड़ता और हमें भी उस पारंपरिक खाने से छुटकारा मिला .
आज महिलाये रसोई को छोड़ आगे बाद चुकी है . आज उनके हाथ में बेलन और कद्ची नही. उनके हाथ में पुस्तके है. , फाइल है , यहाँ तक की तीर है , तलवार है .आज उनका जीवन इस फास्ट-फ़ूड से और भी आसन हो गया है . हमारा भी , इसका भी , उनका भी , उसका भी , तुम्हारा भी ------है ---न
शायद यह देखकर कवि ने कहा है –
पूर्व युग- सा आज का जीवन नही लाचार,
आ चुक्का है दूर-द्वापर से संसार.
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